कोरोना के कारण देशभर में लॉकडाउन लगा हुआ है। इससे अधिकांश आर्थिक गतिविधियां थम सी गई हैं। आर्थिक गतिविधियों के थमने के कारण वित्त वर्ष 2020-21 के बजट और वित्त वर्ष 2019-20 के आर्थिक सर्वे में बताए गए जीडीपी ग्रोथ के सभी पूर्व अनुमान फेल हो गए हैं। ऐसे में सरकार जुलाई या इसके बाद जीडीपी ग्रोथ और बजट लक्ष्य के नए अनुमान जारी कर सकती हैं। हालांकि, यह सभी अनुमान कोरोना के आर्थिक प्रभाव का ज्यादा आंकलन करने के बाद ही जारी किए जाएंगे।
वित्त मंत्रालय ने तैयार किए नए अनुमान
बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार, वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि वित्त वर्ष 2020-21 में जीडीपी ग्रोथ का आंतरिक अनुमान तैयार कर लिया है। लेकिन इनमें बदलाव की संभावना है। अधिकारियों का कहना है कि एक बार अनुमान के फाइनल होने के बाद ही इनकी सार्वजनिक घोषणा की जाएगी। इसके अलावा इन आंकड़ों की घोषणा के तरीके पर भी चर्चा चल रही है। इन आंकड़ों को संसद में पेश किया जाएगा या नहीं? इस पर भी विचार हो रहा है।
जीडीपी अनुमान में बार-बार हो रहा बदलाव
वित्त मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि हमने अपने इस्तेमाल के लिए कुछ अनुमान तैयार किया है, लेकिन इनमें बार-बार बदलाव हो रहा है। यह स्थिति काफी गतिशील और अनजान है। अभी इस बात को लेकर कोई स्पष्टता नहीं है कि यह स्थिति कितने लंबे समय तक रहेगी और 3 मई के बाद अर्थव्यवस्था के खुलने की क्या सीमा रहेगी? लोग काम पर वापस लौटने में कितना समय लेंगे और आर्थिक गतिविधियों के अपनी पूरी क्षमता पर लौटने में कितना समय लगेगा? रिपोर्ट के मुताबिक, इनकम टैक्स अधिकारियों ने बजट के अनुमानों में बदलाव का आग्रह किया है। अधिकारियों ने कहा है लॉकडाउन के कारण अधिकांश कॉरपोरेट सेक्टर बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं, इस कारण बजट के अनुरुप राजस्व जुटाना संभव नहीं है।
नोटबंदी से भी खराब होंगे हालात
एक अन्य अधिकारी ने बताया कि राजस्व के लिहाज से वित्त वर्ष 2020-21 में नोटबंदी के साल 2016-17 से भी ज्यादा खराब हालात होंगे। नोटबंदी के बाद सामान्य से ज्यादा राजस्व मिला था, लेकिन इस साल राजस्व सामान्य से भी कम रहने का अनुमान है। इसके देखते हुए बजट में घोषित किए गए वार्षिक वित्तीय स्टेटमेंट में बदलाव की जरूरत है। इस साल राजस्व वसूली में बड़ी गिरावट का अनुमान है। अधिकारी ने बताया कि रिवाइज्ड वित्तीय स्टेटमेंट जुलाई में कभी भी तैयार हो जाएगा।
आर्थिक सर्वे में जताया था 6.5 फीसदी जीडीपी ग्रोथ का अनुमान
2019-20 के आर्थिक सर्वे में वित्त वर्ष 2020-21 में रियल जीडीपी ग्रोथ 6 से 6.5 फीसदी रहने का अनुमान जताया गया था। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2020-21 के बजट में केंद्र की ओर से कुल 30.4 लाख करोड़ रुपए खर्च होने का प्रावधान किया था। बजट में 24.23 लाख करोड़ रुपए का ग्रोस टैक्स रेवेन्यू, 2.12 लाख करोड़ करोड़ रुपए के विनिवेश और जीडीपी का 3.5 फीसदी फिस्कल डेफेसिट का लक्ष्य रखा था। वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक कोरोना के आर्थिक प्रभाव के कारण यह सभी अनुमान और लक्ष्य अब बेकार हो गए हैं।
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