भारत के लोन मार्केट पर है वॉट्सऐप की नजर, फेसबुक द्वारा रिलायंस इंडस्ट्रीज में हिस्सेदारी खरीदने से रास्ता हुआ आसान - Tech News

Breaking

Post Top Ad

Responsive Ads Here

Thursday, 30 April 2020

भारत के लोन मार्केट पर है वॉट्सऐप की नजर, फेसबुक द्वारा रिलायंस इंडस्ट्रीज में हिस्सेदारी खरीदने से रास्ता हुआ आसान

वॉटसऐप की नजर भारत के लोन मार्केट पर है। कंपनी द्वारा अपनी स्थानीय इकाई के मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन (एमओए) में बताए गए ऑपरेशंस से यह साबित होता है। दरअसल फेसबुक द्वारा पिछले दिनों भारत की दिग्गज कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज में खरीदी गई हिस्सेदारी से यह रास्ता और आसान हो गया है।

वॉट्सऐप की पैरेंट कंपनी है फेसबुक

कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (एमसीए) में दाखिल किये गए फाइल्स से पता चला है कि फेसबुक के ओनरशिप वाली कंपनी ने इसके मद्देनजर अपने मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन (एमओए) में बदलाव किया है। लोन व्यवसाय में प्रवेश करने का इसका इरादा काफी दिलचस्प है। इसकी पैरेंट कंपनी फेसबुक ने 21 अप्रैल को घोषणा की थी कि वह रिलायंस इंडस्ट्रीज की कंपनी जियो प्लेटफार्म में 9.9 हिस्सेदारी का अधिग्रहण करने वाली है।

जल्द ही पेमेंट मार्केट में प्रवेश करेगा वॉट्सऐप

इस गठबंधन से रेगुलेटरी बाधाओं से होने वाली देरी निजात मिल सकती है और वॉट्सऐप का पेमेंट मार्केट में प्रवेश जल्द हो सकता है। भारत में 40 करोड़ यूज़र्स वॉटसऐप को एक बना बनाया मार्केट या कस्टमर फ्रेंचाइजी दे रहा है। कंपनी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह "बैंकिंग रेगुलेशन ऐक्ट 1949 के दायरे में रहकर कोई बैंकिंग व्यवसाय नहीं करेगा। इससे यह साबित होता है कि यह मौजूदा लेंडर्स के साथ ही अपनी टीम बनाएगी।

पेयू ने एनबीएफसी के जरिए किया था प्रवेश

फाइलिंग में कहा गया है कि बिना किसी सुरक्षा के ग्राहकों या अन्य को ऐसी शर्तों पर एडवांस मनी या क्रेडिट देना थोड़ा असुविधाजनक लग सकता है। अब तक पेयू इंडिया जैसे पेमेंट प्लेयर्स ने लेंडिंग बिजनेस में प्रवेश के लिए नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनी (एनबीएफसी) रूट को चुना है। क्रेडिट स्कोरिंग के वैकल्पिक तरीकों के विकास ने ओला, शाओमी और फ्लिपकार्ट जैसे गैर-वित्तीय व्यवसायों को भी क्रेडिट बाजार में प्रवेश पर विचार करने में सक्षम बनाया है।

व्यापक पहुंच इस वेंचर को आगे बढ़ाने में मदद करेगी

इन उपभोक्ता फर्मों के पास ड्राइवरों, विक्रेताओं और डीलरशिप का एक मौजूदा इकोसिस्टम है जिसे वे न्यूनतम ऑपरेटिंग कॉस्ट पर उधार दे सकते हैं। 5.7 बिलियन डॉलर वाली फेसबुक-जियो की डील ने पड़ोस के किराना स्टोर को केंद्र बिंदु मानकर अपनी रणनीति बनाई है। सिटी रिसर्च के विश्लेषकों ने कहा कि आरआईएल की नई कमर्शियल योजनाओं का एक प्रमुख एलिमेंट मॉम एंड पॉप रिटेलर्स के डिजिटाइजेशन को पुश करना है। उन्होंने पाया है कि शुरुआती दिनों में, भारत में वॉट्सऐप की व्यापक पहुंच इस वेंचर को आगे बढ़ाने में मदद कर सकती है।



Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
पेमेंट वर्टिकल शुरू करने से वॉट्सऐप को एक बना बनाया बाजार मिल जाएगा


from Dainik Bhaskar https://ift.tt/3d2lxSI

No comments:

Post a Comment

Pages