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Saturday, 2 May 2020

नई टैक्स व्यवस्था में भी मिलते रहेंगे पुरानी व्यवस्था के कई फायदे, 20 लाख रुपए तक की ग्रेच्युटी पर नहीं लगेगा टैक्स

एक अप्रैल से शुरू हुए वित्त वर्ष 2020-21 में सैलरीड क्लास को पुरानी और नई इनकम टैक्स व्यवस्था में से किसी एक को चुनने का विकल्प दिया गया है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड द्वारा जारी सर्कुलर के मुताबिक ऐसे कर्मचारी जिनकी बिजनेस या प्रोफेशन से आय नहीं है और अगर वे नई टैक्स व्यवस्था को अपनाना चाहते हैं तो उन्हें वित्त वर्ष की शुरुआत में अपने नियोक्ता को इस संबंध में डिक्लेरेशन फॉर्म के जरिए सूचित करना होगा। अगर वे सूचित नहीं करेंगे तो नियोक्ता उनकी आय पर टीडीएस पुरानी व्यवस्था के मुताबिक ही काटेगा। वित्त वर्ष की शुरुआत में किसी एक व्यवस्था के चुनाव के बाद आप पूरे वित्त वर्ष के दौरान दूसरी व्यवस्था नहीं चुन सकते। पुरानी टैक्स व्यवस्था के तहत मिल रहे ज्यादातर डिडक्शन और एग्जेंप्शन का फायदा नई टैक्स व्यवस्था में नहीं ले सकते। फिर भीनई टैक्स व्यवस्थामेंभी कुछ फायदे मिलते रहेंगे। पर्सनल फाइनेंस एक्सपर्ट अजीत कुमार बता रहे हैं ये फायदे....

नई व्यवस्था में इन पर टैक्स छूट का लाभ मिलता रहेगा

  • सेक्शन 24 के तहत हाउस प्रॉपटी की आय पर, बशर्ते हाउस प्रॉपटी को आपने किराये पर दे रखा हो।
  • 80CCD (2) के तहत एनपीएस में नियोक्ता के योगदान परटैक्स छूट का फायदा मिलता रहेगा।
  • रिटायरमेंट के बाद एनपीएस से निकासी पर। या एनपीएस से आंशिक निकासी परटैक्स छूट का फायदा मिलता रहेगा।
  • 5 साल की सेवा के बाद ईपीएफ से निकासी परटैक्स छूट का फायदा मिलता रहेगा ।
  • पीपीएफ और सुकन्या समृद्धि अकाउंट के मैच्योर होने के बाद मिलने वाली मैच्योरिटी की राशि (ब्याज सहित) पर।
  • जीवन बीमा पॉलिसी की अवधि पूरी होने के बाद मिलने वाले सम एश्योर्ड व बोनस पर।
  • अपने नियोक्ता से मिलने वाले अधिकतम 20 लाख रुपए तक की ग्रेच्युटी की राशि पर।
  • वॉलंटरी रिटायरमेंट लेने वालों को रिटायरमेंट के वक्त मिलने वाली एकमुश्त अधिकतम 5 लाख रुपए तक की रकम पर।
  • रिटायरमेंट या नौकरी छोड़ने के समय अधिकतम तीन लाख रुपए तक के लीव इनकैशमेंट पर।
  • पोस्ट ऑफिस में खाताधारकों को एक वित्त वर्ष में इंडिविजुअल बचत खाते पर मिलने वाले अधिकतम 3,500 रुपए जबकि ज्वाइंट अकाउंट के मामले में 7,000 रुपए तक के ब्याज पर छूट का फायदा मिलता रहेगा।


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केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड द्वारा जारी सर्कुलर के मुताबिक ऐसे कर्मचारी जिनकी बिजनेस या प्रोफेशन से आय नहीं है और अगर वे नई टैक्स व्यवस्था को अपनाना चाहते हैं तो उन्हें वित्त वर्ष की शुरुआत में अपने नियोक्ता को इस संबंध में डिक्लेरेशन फॉर्म के जरिए सूचित करना होगा।


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