भारतीय कंपनियों की क्रेडिट रेटिंग में लगातार गिरावट हो रही है। जनवरी से अब तक हर रोज औसत 21 कंपनियों की रेटिंग में गिरावट होती है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2020 में अब तक 3936 भारतीय कंपनियों की रेटिंग गिर चुकी है, जबकि केवल 593 कंपनियों की रेटिंग में सुधार हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी महीने में औसतन 464 कंपनियों की रेटिंग में गिरावट हो रही थी। यह संख्या जून में बढ़कर 582 पर पहुंच गई है। जुलाई के पहले 9 दिनों में 161 कंपनियों की रेटिंग में गिरावट आ चुकी है।
35 फीसदी कंपनियों की क्रेडिट रेटिंग नेगेटिव
क्रेडिट रेटिंग गिरावटके मामले में सबसे ज्यादा मैन्युफैक्चरिंग और नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनीज (एनबीएफसी) सेक्टर की कंपनियांप्रभावित हुई हैं। एसएंडपी ग्लोबल के 24 जून के नोट के मुताबिक, करीब 35 फीसदी भारतीय कंपनियों की क्रेडिट रेटिंग नेगेटिव है या उनका क्रेडिट वॉच नेगेटिव प्रभावों के साथ रखा गया है। रेटिंग एजेंसी के नोट में एनालिस्ट ने कहा था कि यदि आईटी सेक्टर की कर्जमुक्त कंपनियों को निकाल दिया जाए तो रेटिंग में एक या दो अंकों की बढ़ोतरी हो सकती है।
पिछले सप्ताह मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस ने जेएसडब्ल्यू स्टील का आउटलुक नेगेटिव कर दिया था। वहीं, एसएंडपी ने दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (डायल) की रेटिंग को घटाकर ‘B+’ कर दिया था। यात्रा प्रतिबंधों के बीच धीमी रिकवरी की उम्मीद के कारण यह बदलाव किया गया था।
कोरोना महामारी से पहले भी हालात खराब थे
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में कोरोना महामारी के सामने आने से पहले भी हालात खराब थे। वित्त वर्ष 2020 में अर्थव्यवस्था में मंदी के कारण जीडीपी ग्रोथ 4.2 फीसदी रही थी। उदाहरण के लिए, पिछले साल 1691 कंपनियों (बैंकिंग-फाइनेंस कंपनियों को छोड़कर) के नेट प्रॉफिट में 38 फीसदी की गिरावट रही थी। इसमें टीसीएस और रिलायंस इंडस्ट्रीज शामिल नहीं थीं। रिपोर्ट के मुताबिक, महाराष्ट्र और कर्नाटक के बड़े शहरों और इंडस्ट्रियल हब में दोबारा लॉकडाउन के कारण आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं। इससे बैंकों को नुकसान होगा। इंडिया रेटिंग्स ने हाल ही में अनुमान जताया है कि बैंकिंग सिस्टम में तनावग्रस्त कर्ज औसत मौजूदा 11.57 फीसदी से बढ़कर 18.21 फीसदी पर पहुंच सकता है।
कोविड-19 के कारण वित्तीय संस्थानों का ऑपरेटिंग जोखिम बढ़ा
कोविड-19 के कारण भारत में वित्तीय संस्थानों का ऑपरेटिंग जोखिम बढ़ने के चलते एसएंडपी ने 26 जून को 4 प्रमुख एनबीएफसी श्रीराम ट्रांसपोर्ट फाइनेंस, बजाज फाइनेंस, मण्णपुरम फाइनेंस और पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन की रेटिंग को घटाया था। एसएंडपी ने मंदी का अनुमान जताते हुए कहा था कि इससे वित्तीय सेक्टर को नुकसान होगा। एसएंडपी ने कहा था कि अगले 12 महीने में भारत की वित्तीय कंपनियों की एसेट क्वालिटी में गिरावट आएगी, क्रेडिट लागत में बढ़ोतरी होगी और मुनाफा घटेगा। बड़ी संख्या में कर्जदारों के मोराटोरियम का चयन करने के कारण इन कंपनियों के सामने फंडिंग और लिक्विडिटी की समस्या पैदा होगी।
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