कोविड-19 महामारी के मौजूदा संकट के कारण लगभग 77 फीसदी कंपनियों के रेवेन्यू में गिरावट आई है। यह जानकारी हाल के एक वैश्विक सर्वेक्षण में सामने आई है। 720 ट्रांस्फार्म ऑफ दुबई, प्रोफेसी एफजेएलएलसी-मिडल ईस्ट और भारत स्थित इनसाइट्स3डी की ओर से संयुक्त रूप से किए गए एक सर्वे के अनुसार, भारत और मध्यपूर्व में स्थित लगभग सात फीसदी कंपनियों के रेवेन्यू में बढ़ोतरी हुई है जबकि 16 फीसदी कंपनियां अप्रभावित हैं।
सर्वे में 282 कार्यकारियों से बातचीत
इस सर्वे के लिए लगभग 282 कार्यकारियों से बातचीत की गई, जिसमें सभी उद्योग सेगमेंट के सीईओ और एमडी शामिल हैं। जिन कंपनियों पर नकारात्मक असर पड़ा है और उनके रेवेन्यू में गिरावट दर्ज की है। इसमें से 30 फीसदी कंपनियों के रेवेन्यू में 50 फीसदी से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है। जबकि 30 फीसदी कंपनियों के रेवेन्यू में 30-50 फीसदी की गिरावट आई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सर्वे में शामिल लगभग 30 फीसदी कंपनियों को कठोर उपाय अपनाने की जरूरत होगी, इसमें बिक्री या विलय जैसे उपाय भी शामिल हैं।
न्यू नॉर्मल स्थिति की परिकल्पना सही साबित हुई: राजा
रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रोफेसी एफजेडएलएलसी के राजा मारुर ने कहा कि हमारी यह मान्यता कि एक न्यू नॉर्मल स्थिति की परिकल्पना की जा रही है। इस परिकल्पना को इस सर्वे ने सही साबित किया है। इसके अलावा संगठनों पर पड़े असर उनकी सप्लाई चेन के वैश्विक एकीकरण के पैमाने और स्तर के लिहाज से अलग-अलग हैं। अधिकांश कंपनियां रिमोट वर्किंग और विकेंद्रीकरण की परिकल्पना कर रहे हैं। इसको ऑटोमेशन प्रक्रिया से जोड़ा जा रहा है। इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस पर भरोसा बढ़ा है।
मांग और लिक्विडिटी की समस्या का सामना कर रही हैं कंपनियां
सर्वे में पाया गया है कि इस मौजूदा संकट में अधिकांश कंपनियां मांग, लिक्विडिटी और वित्तीयउपलब्धता की समस्या का सामना कर रही हैं। इसमें भी सबसे ज्यादा माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज (एमएसएमई) प्रभावित हुई हैं।
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