इस साल जुलाई में भारत का कच्चे तेल के आयात का आंकड़ा पिछले 10 साल से ज्यादा समय के निचले स्तर पर पहुंच गया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जुलाई के महीने में कच्चे तेल के आयात में पिछले साल के मुकाबले 36.4% से ज्यादा की गिरावट आई है। ये स्तर मार्च 2010 के बाद का सबसे निचला स्तर है। बता दें कि भारत रिफाइंड फ्यूल का आयात और निर्यात दोनों ही करता है
कच्चे तेल के आयात में गिरावट
पेट्रोलियम एवं नेचुरल गैस मंत्रालय के पीपीएसी (PPAC) द्वारा जारी डाटा के मुताबिक कोरोना वायरस की वजह से लगाए गए नए प्रतिबंधों से कच्चे तेल की मांग में गिरावट आई है। पिछले महीने कच्चे तेल का आयात एक साल पहले की तुलना में 36.4% घटकर 12.34 मिलियन टन रहा। बता दें कि कच्चे तेल के आयात में गिरावट का यह लगातार चौथा महीना है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयात करने वाला देश है।
रिफाइंड उत्पादों के आयात में बढ़त
फ्यूल आयल के आयात में बढ़त से भारत में रिफाइंड उत्पादों का आयात 46.4 फीसदी बढ़कर 4.07 मिलियन टन हो गया है। फ्यूल आयल का आयात जुलाई महीने में रिकॉर्ड 1.22 मिलियन टन का हो गया है, जो पिछले साल 127,000 टन था। दूसरी तरफ रिफाइंड प्रोडक्ट के निर्यात में 22.7 फीसदी की गिरावट रही, जो अप्रैल 2018 के बाद से निचले स्तर पर पहुंच गया है। ।
हाल में जारी हुए सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जुलाई में फ्यूल की खपत में पिछले साल के मुकाबले 11.7 फीसदी कम आई है। वहीं जून के मुकाबले इसमें करीब 3.5% की गिरावट है।
डीजल की खपत में गिरावट
आयात में बड़ी हिस्सेदारी वाले डीजल की मांग जुलाई में पिछले साल के मुकाबले 19% से ज्यादा घटी है। दरअसल , भारत में डीजल की खपत ट्रांसपोर्टेशन और खेती के कार्यों में ज्यादा होता है। लेकिन मार्च से जारी लॉकडाउन के कारण इसकी खपत में गिरावट आई है। वहीं, पेट्रोल की मांग में जुलाई के दौरान 10 फीसदी की गिरावट रही।
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