जून और जुलाई के बाद अगस्त में भी भारतीय पूंजी बाजार विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के लिए आकर्षक बना हुआ है। इस महीने 3 से 21 अगस्त के बीच एफपीआई ने भारतीय पूंजी बाजार (शेयर और डेट बाजार) में शुद्ध तौर पर 41,330 करोड़ रुपए का निवेश किया। नेशनल सिक्युरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (एनएसडीएल) के आंकड़ों के मुताबिक एफपीआई ने भारत में जुलाई में 3,301 करोड़ रुपए और जून में भी 26,009 करोड़ रुपए लगाए थे।
विशेषज्ञों के मुताबिक दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में नकदी बहुत ज्यादा बढ़ गई है। वहां से यह पैसा भारत जैसे उभरते बाजारों में भी पहुंच रहा है। डिपॉजिटरी के आंकड़ों के मुताबिक इस महीने अब तक एफपीआई ने भारत के शेयर बाजार में 40,262 करोड़ रुपए और डेट बाजार में 1,068 करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश किया।
केंद्रीय बैंकों ने अपनी गिरती अर्थव्यवस्थाओं को संभालने के लिए बड़-बड़े राहत पैकेज दिए हैं
मॉर्निंग स्टार इंडिया के एसोसिएट डायरेक्टर-मैनेजर रिसर्च हिमांशु श्रीवास्तव के मुताबिक वैश्विक बाजारों में नकदी काफी बढ़ गई है। क्योंकि प्रमुख केंद्रीय बैंकों ने कोरोनावायरस महामारी के कारण अपनी गिरती अर्थव्यवस्थाओं को संभालने के लिए बड़े-बड़े राहत पैकेज दिए हैं। अमेरिका लगातार नोट छाप रहा है। यह पैसा भारत और अन्य उभरते बाजारों में पहुंच रहा है।
भारत में शेयरों का वैल्यू आकर्षक स्तर पर है
श्रीवास्तव ने कहा कि भारत जैसे कई देशों के बाजार बहुत अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं और इनमें अच्छा रिटर्न मिलने की संभावना दिख रही है। इसके अलावा लॉकडाउन के बाद भारत की अर्थव्यवस्था खुल रही है। भारत में शेयरों को वैल्यू भी अभी आकर्षक स्तर पर है। ये बातें विदेशी पूंजी को भारत में खींच रहे हैं।
अब मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर खरीद रहे हैं एफपीआई
ग्रो के सह-संस्थापक और सीओओ हर्ष जैन ने कहा कि ब्लूचिप शेयरों में निवेश करने के बाद एफपीआई ने अब मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में निवेश करना शुरू किया है। इससे पहले उन्होंने गोल्ड या ब्लूचिप शेयरों में निवेश किया था। क्योंकि वे ज्यादा स्थिर और कठिन समय से निपटने में सक्षम माने जाते हैं।
भारत और ब्राजील को छोड़कर इस महीने अब तक एफपीआई अन्य उभरते बाजारों में बिकवाल रहे
कोटक सिक्युरिटीज के फंडामेंटल रिसर्च प्रमुख और एक्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट रुस्मिक ओझा ने कहा कि भारत और ब्राजील को छोड़कर एफपीआई इस सप्ताह और इस महीने अब तक अन्य उभरते बाजारों में शुद्ध बिकवाल बने रहे। हर्ष जैन ने कहा कि अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव और उसका परिणाम भविष्य में एफपीआई की दिशा को प्रभावित कर सकता है।
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