भारत में रिटेल निवेशकों का छोटे साइज के स्टॉक्स इस कदर पसंद आ रहे हैं कि चुनिंदा कंपनियों के शेयर 4,300 प्रतिशत तक की बढ़त देखने को मिल रही है। बिना किसी बिक्री के भी कंपनियां शानदार मुनाफा कमा रही हैं। इसमें ट्रांसग्लोब फूड्स लिमिटेड का शेयर सबसे आगे है। शेयर में इस साल करीब 4,300 प्रतिशत की तेजी रही। इसके अलावा रियल एस्टेट सेक्टर की कंपनी श्री प्रीकोटेड स्टील्स में इस साल (2020-21) करीब 1,300 प्रतिशत की तेजी रही। बता दें कि दोनों कंपनियों को नए वित्त वर्ष में बिना किसी बिक्री के कारण घाटा भी हुआ है।
बड़ी संख्या में जुडे़ रिटेल निवेशक
स्माल कैप में आई रैली की वजह पिछले दिनों बड़ी संख्या में जुडे़ शौकिया रिटेल निवेशक हैं। सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज लिमिटेड (सीडीएसएल) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, मार्च से अब तक करीब 28 लाख नए रिटेल अकाउंट खुले हैं। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि इनमें से ज्यादातर निवेशकों को फंडामेंटल और वैल्यूएशन मैट्रिक्स की बेसिक जानकारी भी नहीं है और ऐसे निवेशक ही स्टॉक्स के एबिटा या कमाई के बारे में रिसर्च किए बिना ही खरीदारी कर रहे हैं।
छोटे स्टॉक्स में पुलबैक का खतरा
लेकिन चिंता की बात यह है कि रिटेल निवेशकों द्वारा शेयर बाजार से अचानक निकासी के चलते नुकसान होता है। इससे जोखिम भरे निवेश पर मिलने वाले रिटर्न को लेकर चिंताएं बढ़ती हैं। ब्रॉर्डर मार्केट में रिटेल निवेशकों द्वारा निवेशित छोटे स्टॉक्स में पुलबैक का खतरा रहता है। स्टॉक्स में पुलबैक का मतलब होता है कि लंबी अवधि के रुझान में थोड़े समय के लिए स्टॉक्स का ट्रेंड से विपरीत होना। हालांकि बाजार के जानकारों का कहना है कि बाजार में निवेशकों को छोटे शेयरों के बजाय, क्वालिटी वाले शेयरों के साथ बने रहना चाहिए।
छोटे साइज वाले स्टॉक्स में शानदार रिकवरी
कोरोनाकाल में ज्यादातर स्टॉक्स में भारी बिकवाली रही, लेकिन मार्केट में छोटे साइज वाले स्टॉक्स में शानदार रिकवरी रही। बीएसई स्माल कैप इंडेक्स मार्च के निचले स्तरों से करीब 69 फीसदी ऊपर है और साल 2020 में इंडेक्स करीब 9.3 फीसदी ऊपर है। वहीं, सेंसेक्स अपने मार्च के निचले स्तर से करीब 50 फीसदी ही रिकवर कर पाया है। जबकि साल 2020 में 5.3 फीसदी नीचे है। बुधवार को बीएसई सेंसेक्स फरवरी के बाद पहली बार 39 हजार का आंकड़ा छू पाया था।
ब्लूमबर्ग के मुताबिक मार्च के निचले स्तर से शेयर बाजार लगभग 56.9 लाख करोड़ रुपए बढ़ा है। यह आंकड़ा केवल लोकल निवेशकों कारण नहीं हुआ है बल्कि विदेशी निवेशकों का भारतीय मार्केट में निवेश का नतीजा है।
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