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Sunday, 2 August 2020

डिस्कॉम पर बिजली उत्पादक कंपनियों का बकाया 47% बढ़ा, जून तक 1.33 लाख करोड़ रुपए की उधारी

बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) पर बिजली उत्पादक कंपनियों (जेनको) का कुल बकाया जून, 2020 में सालाना आधार पर 47 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 1.33 लाख करोड़ रुपए हो गया है। जून, 2019 तक डिस्कॉम पर बिजली वितरण कंपनियों का बकाया 90,655 करोड़ रुपए था। पेमेंट रैटिफिकेशन एंड एनालिसिस इन पावर प्रोक्यूरमेंट फॉर ब्रिंगिंग ट्रांसपैरेंसी इन इन्वायसिंग ऑफ जेनरेशन (प्राप्ति) पोर्टल से यह जानकारी मिली है। बीते एक साल में करीब 42 हजार करोड़ रुपए का बकाया बढ़ा

मई 2018 में शुरू हुआ था प्राप्ति पोर्टल

बिजली उत्पादकों तथा वितरकों के बीच बिजली खरीद लेनदेन में पारदर्शिता लाने के लिए प्राप्ति पोर्टल मई, 2018 में शुरू किया गया था। जून, 2020 तक 60 दिन की अनुग्रह या ग्रेस की अवधि के बाद भी डिस्कॉम पर बकाया राशि 1,20,041 करोड़ रुपए थी। यह एक साल पहले 72,362 करोड़ रुपए थी। पोर्टल के ताजा आंकड़ों के अनुसार, जून में कुल बकाया इससे पिछले महीने की तुलना में बढ़ा है। मई में डिस्कॉम पर कुल बकाया 1,26,963 करोड़ रुपए था। जून, 2020 में भुगतान की मियाद अवधि समाप्त होने के बाद डिस्कॉम पर बकाया राशि मई के 1,13,869 करोड़ रुपए से बढ़ी है।

डिस्कॉम को भुगतान के लिए 60 दिन का समय मिलता है

बिजली उत्पादक कंपनियां डिस्कॉम को बेची गई बिजली के बिल का भुगतान करने के लिए 60 दिन का समय देती हैं। उसके बाद यह राशि पुराने बकाए में आ जाती है। ज्यादातर ऐसे मामलों में बिजली उत्पादक दंडात्मक ब्याज वसूलते हैं। बिजली उत्पादक कंपनियों को राहत के लिए केंद्र ने एक अगस्त, 2019 से भुगतान सुरक्षा प्रणाली लागू है। इस व्यवस्था के तहत डिस्कॉम को बिजली आपूर्ति पाने के लिए साख पत्र देना होता है। केंद्र सरकार ने बिजली वितरण कंपनियों को भी कुछ राहत दी है। कोविड-19 महामारी की वजह से डिस्कॉम को भुगतान में देरी के लिए दंडात्मक शुल्क को माफ कर दिया है।

सरकार की डिस्कॉम में 90 हजार करोड़ डालने की योजना

सरकार ने मई में डिस्कॉम के लिए 90,000 करोड़ रुपए की नकदी डालने की योजना पेश की थी। इसके तहत बिजली वितरण कंपनियां पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन तथा आरईसी लिमिटेड से सस्ता कर्ज ले सकती हैं। इस पहल से बिजली उत्पादक कंपनियों को भी राहत मिलेगी। बताया जाता है कि कुछ राज्यों के आग्रह पर सरकार इस पैकेज को बढ़ाकर 1.25 लाख करोड़ रुपए करने जा रही है। आंकड़ों से पता चलता है कि राजस्थान, उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु की बिजली वितरण कंपनियों का उत्पादक कंपनियों के बकाए में सबसे अधिक हिस्सा है।

एनटीपीसी को वसूलने हैं 19,298 करोड़ रुपए

भुगतान की मियाद की अवधि समाप्त होने के बाद जून तक डिस्कॉम पर कुल 1,20,041 करोड़ रुपए का बकाया हैं। इसमें स्वतंत्र बिजली उत्पादकों का हिस्सा 34.78 प्रतिशत है। वहीं, केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम क्षेत्र की जेनको का बकाया 36.58 प्रतिशत है। सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों में अकेले एनटीपीसी को ही डिस्कॉम से 19,298.77 करोड़ रुपए वसूलने हैं। एनएलसी इंडिया का बकाया 6,280.76 करोड़ रुपए, दामोदर वैली कॉरपोरेशन का 5,570.99 करोड़ रुपए, एनएचपीसी का 3,518.97 करोड़ रुपए तथा टीएचडीसी इंडिया का बकाया 2,551.32 करोड़ रुपए है।

अडाणी पावर का 22,319 करोड़ रुपए बकाया

निजी बिजली उत्पादक कंपनियों में अडाणी पावर का बकाया 22,319.41 करोड़ रुपए, बजाज समूह की ललितपुर पावर जेनरेशन कंपनी का 3,884.91 करोड़ रुपए, एसईएमबी (सेम्बकॉर्प) का 2,210.22 करोड़ रुपए तथा जीएमआर का 1,930.16 करोड़ रुपए है। गैर-परंपरागत ऊर्जा स्रोतों मसलन सौर और पवन ऊर्जा कंपनियों का बकाया 10,111.33 करोड़ रुपए है।



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बिजली उत्पादकों तथा वितरकों के बीच बिजली खरीद लेनदेन में पारदर्शिता लाने के लिए प्राप्ति पोर्टल मई, 2018 में शुरू किया गया था।


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