'वोकल फॉर लोकल' थीम के तहत सरकार जल्द बाजार में एक पायलट प्रोजेक्ट लॉन्च कर सकती है। जिसका उद्देश्य जीआई (GI) टैग से देसी उत्पादों को अलग पहचान दिलाना है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार इसी हफ्ते ई-कॉमर्स कंपनियों से बात कर सकती है। मीटिंग में ई-कॉमर्स दिग्गजों फ्लिपकार्ट, अमेजन और स्नैपडील से दिशा-निर्देश और प्रशिक्षण पर बातचीत होगी।
ई-कॉमर्स कंपनियों के साथ मीटिंग
74वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत में बने उत्पादों को वैश्विक स्तर पर ले जाने की बात कही थी। सरकार देश में आत्मनिर्भर भारत योजना के अंतर्गत लोकल प्रोडक्ट और उसके निर्माता कंपनियों को आर्थिक रूप से बढ़ावा देने के लिए नई योजना पर काम कर रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक डीपीआईआईटी (DPIIT) इसी हफ्ते ई-कॉमर्स कंपनियों से जीआई टैग पर बात कर सकती है।
मीटिंग में जीआई टैग के तहत उत्पाद के मूल भौगोलिक स्थानों का ब्यौरा देने के साथ-साथ उत्पादों के विक्रेताओं को उनकी लिस्टिंग, शिपिंग और निर्यात के लिए प्रशिक्षण और दिशानिर्देश पर भी चर्चा करेगी। जिसमें ग्राहकों को उत्पाद के मूल शहर या क्षेत्र के नाम का भी पता चल पाएगा। जैसे दार्जिलिंग की चाय और कश्मीरी कहवा है।
लोकल प्रोडक्ट को मिलेगी अलग पहचान
देश में मार्च 2020 में 361 जीआई उत्पादों का पंजीकरण हुआ है। अभी तक जीआई उत्पादों की ज्यादातर बिक्री परंपरागत होती थी। मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार ई-कॉमर्स कंपनियों को ऑनलाइन रिटेलर्स से प्रोडक्ट के लोगो के निर्माण पर बात कर सकती है। इसमें DPIIT के संयुक्त सचिव शामिल होंगे।
अनुमान है कि सरकार के इस कदम से देसी उत्पादों का स्व-सेवा मॉडल के तहत बिक्री में ग्रोथ मिलेगा। जिससे स्वतंत्र रूप से ऑनलाइन व्यापार लाभ मिलेगा।
क्या होता है जीआई टैग ?
भौगोलिक संकेत (GI) एक ऐसा नाम या प्रतीक होता है जिसे कृषि, प्राकृतिक, मशीनरी और खान-पान आदि से संबंधित उत्पादों के लिए किसी क्षेत्र विशेष (देश, प्रदेश या शहर) के किसी व्यक्ति, व्यक्तियों के समूह या संगठन को दिया जाता है। भौगोलिक संकेत (GI) टैग भौगोलिक संकेतक (पंजीकरण और संरक्षण) अधिनियम, 1999 के अनुसार दिया जाता है। यह 2003 से लागू हुआ था।
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