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Monday, 28 September 2020

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से और समय मांगा; अब 5 अक्टूबर को होगी सुनवाई, 3 नवंबर तक एनपीए घोषित नहीं होंगे बैंक खाते

लोन मोराटोरियम को बढ़ाने और ब्याज पर ब्याज माफी को लेकर सोमवार को एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान सीनियर एडवोकेट राजीव दत्ता ने कहा कि केंद्र सरकार इस मामले में अभी तक कोई ठोस फैसला नहीं ले पाया है। ऐसे में उसे और समय चाहिए। काउंसिल ने कहा कि इस मामले को जल्द से जल्द सुनवाई के लिए लिस्ट करना चाहिए। इसके बाद जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने इस मामले को सुनवाई के लिए 5 अक्टूबर तक के लिए स्थगित कर दिया।

आर्थिक मुद्दे सामने आ रहे हैं: सॉलिसिटर जनरल

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट से कहा कि इस मामले में कुछ आर्थिक मुद्दे सामने आ रहे हैं। इन मुद्दों को सुलझाने के लिए और समय की आवश्यकता है। कोर्ट ने केंद्र सरकार को इस मामले में 1 अक्टूबर तक एफिडेविट दाखिल करने को कहा है।

3 नवंबर तक एनपीए नहीं होंगे बैंक खाते

सुप्रीम कोर्ट ने 3 सितंबर को कहा था कि लोन का भुगतान नहीं करने वाले बैंक खातों को 2 महीने तक एनपीए घोषित नहीं किया जाए। आज सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि बैंक खातों को 2 महीने तक एनपीए घोषित नहीं करने का आदेश जारी रहेगा। यानी बैंक 3 नवंबर तक भुगतान नहीं करने वाले खातों को एनपीए घोषित नहीं कर सकेंगे।

पिछली सुनवाई में दिया था दो सप्ताह का समय

10 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर ठोस फैसला लेने के लिए केंद्र सरकार को दो सप्ताह के समय दिया था। कोर्ट ने कहा था कि केंद्र को यह अंतिम मौका दिया जा रहा है। सुनवाई के दौरान केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि वह इस मामले को लेकर बैंकों और अन्य हितधारकों से बातचीत कर रहा है। इस संबंध में दो से तीन राउंड की बैठक हो चुकी है और मामले का परीक्षण किया जा रहा है।

केंद्र सरकार ने गठित की है एक्सपर्ट कमेटी

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केंद्र सरकार ने 10 सितंबर को महर्षि कमेटी का गठन किया था। इसके बाद सरकार ने पूर्व CAG राजीव महर्षि की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया था। इस कमेटी में आईआईएम अहमदाबाद के पूर्व प्रोफेसर रविंद्र एच ढोलकिया और एसबीआई-आईडीबीआई बैंक के पूर्व एमडी बी. श्रीराम भी शामिल हैं।

ब्याज पर ब्याज में छूट देने के मूड में नहीं कमेटी

हाल ही में सूत्रों के हवाले से न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट में कहा गया था कि राजीव महर्षि की अध्यक्षता वाली एक्सपर्ट कमेटी ब्याज पर ब्याज में छूट नहीं देने की सिफारिश कर सकती है। इस कमेटी की सिफारिश सुप्रीम कोर्ट के फैसले में अहम भूमिका निभाएगी।

31 अगस्त को खत्म हुई है लोन मोरेटोरियम की सुविधा

कोरोना संक्रमण के आर्थिक असर को देखते हुए आरबीआई ने मार्च में तीन महीने के लिए मोरेटोरियम सुविधा दी थी। यह सुविधा 1 मार्च से 31 मई तक तीन महीने के लिए लागू की गई थी। बाद में आरबीआई ने इसे तीन महीनों के लिए और बढ़ाते हुए 31 अगस्त तक के लिए कर दिया था। यानी कुल 6 महीने की मोरेटोरियम सुविधा दी गई थी।

क्या है मोरेटोरियम?

जब किसी प्राकृतिक या अन्य आपदा की वजह से कर्ज लेने वालों की वित्तीय हालत खराब हो जाती है, तो कर्ज देने वालों की ओर से भुगतान में कुछ समय के लिए मोहलत दी जाती है। कोरोना संकट के कारण देश में भी लॉकडाउन लगाया गया था। इस कारण बड़ी संख्या में लोगों के सामने रोजगार का संकट पैदा हो गया था। इस संकट से निपटने के लिए आरबीआई ने 6 महीने के मोरेटोरियम की सुविधा दी थी। इस अवधि के दौरान सभी तरह के लोन लेने वालों को किश्त का भुगतान करने की मोहलत मिल गई थी।

वन टाइम लोन रीस्ट्रक्चरिंग स्कीम लेकर आया है आरबीआई

मोरेटोरियम खत्म होने की सूरत में कर्ज लेने वालों की समस्या को दूर करने के लिए आरबीआई वन टाइम लोन रीस्ट्रक्चरिंग स्कीम लेकर आया है। आरबीआई के मुताबिक, कॉरपोरेट घरानों के अलावा इंडिविजुअल को भी इस स्कीम का फायदा मिलेगा। कंज्यूमर लोन, एजुकेशन लोन, हाउसिंग लोन, शेयर मार्केट-डिबेंचर खरीदने के लिए लिया गया लोन, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स खरीदने के लिए लिया गया लोन, क्रेडिट कार्ड लोन, ऑटो लोन (कमर्शियल व्हीकल लोन छोड़कर), गोल्ड, ज्वैलरी, एफडी के बदले लिया गया लोन, पर्सनल लोन टू प्रोफेशनल्स और अन्य किसी काम के लिए लिए गए पर्सनल लोन पर भी रीस्ट्रक्चरिंग स्कीम का फायदा लिया जा सकता है।

लोन रीस्ट्रक्चरिंग स्कीम में मिल सकते हैं ये विकल्प

  • बैंक इंडिविजुअल बॉरोअर को पेमेंट री-शेड्यूल की सुविधा दे सकते हैं।
  • ब्याज को क्रेडिट सुविधा के रूप में अलग किया जा सकता है।
  • इनकम को देखते हुए बैंक व्यक्तिगत तौर पर मोरेटोरियम की सुविधा दे सकते हैं। हालांकि, यह दो साल से ज्यादा अवधि के लिए नहीं होगी।
  • ईएमआई कम करने के लिए लोन की अवधि बढ़ाई जा सकती है।
  • अगर मोरेटोरियम विकल्प पर सहमति होती है तो रेजोल्यूशन प्लान पूरा होते ही यह लागू हो जाएगा।


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लोन मोराटोरियम की अवधि बढ़ाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है।


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