मेक इन इंडिया को बढ़ावा देने के लिए सरकार घरेलू क्रूड तेल पर सेस को आधा करने पर विचार कर रही है। इससे देश में तेल और गैस की खोज को बढ़ावा मिलेगा। यदि सरकार सेस को आधा कर देती है तो तेल उत्पादकों को अपना मार्जिन बनाए रखने और खोज संबंधी गतिविधियों में तेजी लाने में मदद मिलेगी।
अभी घरेलू क्रूड पर लगता है 20% सेस
सूत्रों के मुताबिक, तेल मंत्रालय और क्रूड इंडस्ट्री से जुड़े लोगों ने सेस में कटौती को लेकर वित्त मंत्रालय के पास प्रस्ताव भेजा है। मौजूदा समय में घरेलू क्रूड पर 20 फीसदी सेस की वसूली की जाती है। यदि वित्त मंत्रालय इस प्रस्ताव को मंजूर कर लेता है तो घरेलू क्रूड पर सेस घटकर 10 फीसदी रह जाएगा। तेल मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि हम मौजूदा टैक्स छूटों के साथ तेल पर सेस में कमी की उम्मीद कर रहे हैं। लेकिन इस मामले में अंतिम फैसला वित्त मंत्रालय को ही लेना है।
घरेलू कंपनियों को मिलेगी मदद
सेस को आधा करने से सरकार को रेवेन्यू के मोर्चे पर बड़ा नुकसान होगा, लेकिन सही राशि का अनुमान बाद में ही लगाया जा सकता है। सेस को आधा करने से रेवेन्यू पर पड़ने वाले असर का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि अकेली ओएनजीसी सालाना 10 हजार करोड़ रुपए का भुगतान इसी मद में करती है। हालांकि, इस कदम से घरेलू कंपनियों को कारोबार में मदद मिलेगी। इसका कारण यह है कि आयातित क्रूड से सेस नहीं मिलता है।
मेक इन इंडिया की भावना के खिलाफ है सेस: फिक्की
हाल ही में औद्योगिक संगठन फिक्की ने वित्त मंत्रालय को एक मेमोरेंडम दिया था। इसमें कहा गया था कि घरेलू स्तर पर उत्पादित किए गए क्रूड पर सेस लगता है। जबकि आयातित क्रूड पर सेस नहीं लगता है। ऐसे में आयातित क्रूड के मुकाबले घरेलू स्तर पर आयातित क्रूड पर सेस लगाना हानिकारक है। यह लेवी मेक इन इंडिया की भावना के खिलाफ है।
2017 में बदली थी सेस की दर
वित्त मंत्रालय ने 2017 के केंद्रीय बजट में तेल पर लगने वाले सेस की दरों में बदलाव किया था। तब मंत्रालय ने 4500 रुपए प्रति टन के बजाए क्रूड की कीमत का 20 फीसदी सेस लगाया था। क्रूड की कीमतों में गिरावट के समय कंपनियों की मदद के लिए सेस की दर में बदलाव किया गया था। इस समय क्रूड की कीमतें 40 बैरल प्रति डॉलर के आसपास चल रही हैं। क्रूड की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण घरेलू क्रूड उत्पादकों को नुकसान होता है।
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