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Tuesday, 20 October 2020

किसान क्रेडिट कार्डधारकों के लिए बैंकों ने दिया 1.35 लाख करोड़ रुपए की रियायती कर्ज को मंजूरी, देश के डेढ़ करोड़ अन्नदाताओं तक पहुंचा लाभ

किसानों के लिए खुशखबरी है। बैंकों ने किसान क्रेडिट कार्ड स्कीम (केसीसी) से डेढ़ करोड़ किसानों को जोड़ा है। कोरोना संकट के बीच किसानों के लिए 1.35 लाख करोड़ रुपए के रियायती कर्ज की भी मंजूरी दी गई है। यह जानकारी सोमवार को वित्त मंत्रालय ने दी।

कोरोना संकट में किसानों के लिए आर्थिक सहायता

वित्त मंत्रालय के मुताबिक, महामारी के दौरान आत्मनिर्भर भारत पैकेज में सरकार ने केसीसी के तहत आने वाले 2.5 करोड़ किसानों को जोड़ने की बात कही थी। इसकी वजह आर्थिक दिक्कतों का सामना कर रहे किसानों को उनकी फाइनेंशियल जरूरतों को पूरा करने में मदद करना है। इसके तहत अर्थव्यवस्था में दो लाख करोड़ रुपए की कर्ज सहायता देने की भी बात कही गई थी।

किसान क्रेडिट कार्ड से किसानों को लाभ

मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि, बैंकों और अन्य संबधित पक्षों द्वारा सही दिशा में किए लगातार प्रयासों से सस्ते ब्याज दर पर कर्ज मुहैया कराने पर काम किया गया। इसी का ही परिणाम है कि मछली पालकों, पशु पालकों समेत 1.5 करोड़ किसानों को केसीसी तहत कवर किया जा चुका है, जो एक बड़ी उपलब्धी है। बयान के मुताबिक, जारी किए गए सभी किसान क्रेडिट कार्ड्स के लिए खर्च की कुल सीमा 1.35 लाख करोड़ रुपए के स्तर पर पहुंच गई है।

किसानों के हित में बड़े कदम

भारत सरकार, किसान क्रेडिट कार्ड के तहत किसानों को ब्याज पर दो प्रतिशत की आर्थिक सहायता देती है। इसके अलावा समय पर कर्ज चुकाने वाले किसानों को तीन प्रतिशत की प्रोत्साहन छूट भी दी जाती है। इस तरह केसीसी पर सालाना ब्याज दर चार प्रतिशत की आती है। सरकार ने किसानों के हित में बड़े कदम उठाते हुए 2019 में केसीसी में ब्याज दर में आर्थिक सहायता के प्रावधान को शामिल करते हुए इसका लाभ डेयरी बिजनेस समेत पशुपालकों और मछली पालकों को भी देने की व्यवस्था सुनिश्चित की है।

केसीसी कर्ज की सीमा में बढ़ोतरी

साथ ही बिना किसी गारंटी के दिये जाने वाले केसीसी कर्ज की सीमा को 1 लाख से बढ़ाकर 1.60 लाख रुपए कर दिया गया है। सरकार का मानना है कि, सस्ते ब्याज दर पर कर्ज उपलब्ध कराने के इस अभियान से न सिर्फ किसानों की आय में बढ़ोतरी होगी बल्कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। इसके अलावा कृषि तथा इससे जुड़े क्षेत्रों में भी उत्पादन बढ़ेगा।

यह देश के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में भी विशेष भूमिका होगी। किसान क्रेडिट स्कीम को 1998 में शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य किसानों को कृषि गतिविधियों के लिए बिना किसी बाधा के समय पर कर्ज उपलब्ध कराना था।



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सरकार का मानना है कि, सस्ते ब्याज दर पर कर्ज उपलब्ध कराने के इस अभियान से न सिर्फ किसानों की आय में बढ़ोतरी होगी बल्कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।


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