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Friday, 13 November 2020

ट्रम्प सरकार का नया फरमान; चाइनीज आर्मी से संबंध रखने वाली 31 कंपनियों में निवेश पर लगा प्रतिबंध

डोनाल्ड ट्रम्प ने एक नया आदेश जारी किया है। इसके मुताबिक चीन की सेना (PLA) के साथ संबंध रखने वाली 31 कंपनियों में अमेरिकी निवेश पर बैन लगा दिया गया है। माना जा रहा है कि अमेरिका का यह कदम चीन पर दबाव बनाने के लिए उठाया गया है। राष्ट्रपति ट्रम्प ने इस नए आदेश को गुरुवार मंजूरी दी। आदेश में कहा गया है कि - चीन, अमेरिकी निवेश का इस्तेमाल अपनी मिलिट्री को मॉडर्न बनाने में कर रहा है। इससे अमेरिकी सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा हो गया है।

आदेश के बाद शेयरों में गिरावट

अमेरिका के इस आदेश के बाद शुक्रवार को चीन के टॉप शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिली। इसमें चाइना मोबाइल लि. का शेयर 6.1% और चाइना टेलीकॉम कॉर्पोरेशन लि. के शेयर 9.3% नीचे फिसल गए। आदेश से अमेरिकी कंपनियों और पेंशन फंड को पेंटागन द्वारा चुने 31 चाइनीज कंपनियों के शेयरों को खरीदने और बेचने पर प्रतिबंध लगेगा, जो जून से PLA के साथ संपर्क में हैं। चीन की स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनी हुवावे को अमेरिका ने पहले ही ब्लैक लिस्ट में रखा है।

अगले साल से लागू होगा आदेश

यह आदेश अगले साल 11 जनवरी से लागू हो जाएगा। नए आदेश में अमेरिकी कंपनियों और पेंशन फंड्स को नवंबर 2021 तक का समय दिया गया है ताकि वो सेना के साथ संबंध रखने वाली कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी शुन्य कर लें। चीन की कंपनियों में से अपनी हिस्सेदारी बाहर निकालने की अनुमति दी जाएगी, जो सेना के साथ संबंध रखती हैं। ऐसे में अगर और भी चीन की कंपनियों को सेना के साथ संबंध रखते पाया जाता है तो अमेरिकी निवेशकों को उन कंपनियों से निवेश शून्य करने के लिए 60 दिनों का समय दिया जाएगा।

अमेरिकी निवेश की सुरक्षा

नए आदेश पर अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रॉबर्ट ओब्रायन ने कहा कि कई कंपनियां दुनियाभर के बाजारों में ट्रेड करती हैं। इसमें अमेरिकी कंपनियां शामिल हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिकी निवेशक अनजाने में पैसिव इन्वेस्टमेंट करते हैं। इसमें म्युचुअल फंड्स और रिटायरमेंट प्लान शामिल हैं। ऐसे में यह आदेश अमेरिकी निवेशकों को पीपल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) और चाइनीज इंटेलिजेंस से संबंध रखने वाली कंपनियों में अनजान निवेश करने से सुरक्षित रखेगा।

चीन से ट्रम्प की नाराजगी

दरअसल, 2020 की शुरुआत में ट्रेड डील साइन के साथ ही चीन और अमेरिका के बीच के रिश्ते बिगड़ने शुरु हो गए थे। इसके अलावा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, चीन को कोरोना महामारी का जिम्मेदार भी मानते हैं, जिसके लिए सजा भी देना चाहते हैं। क्योंकि महामारी के कारण केवल अमेरिका में 2.48 लाख लोगों की मोत हो चुकी है। चीन में मुस्लिमों की हालत और हॉन्गकॉन्ग के मुद्दे पर भी ट्रम्प चीन से काफी नाराज चल रहे हैं। दूसरी ओर चीन ने भी अमेरिकी कंपनियों को अपनी ब्लैक लिस्ट में शामिल कर पलटवार किया है।



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यह आदेश अगले साल 11 जनवरी से लागू हो जाएगा। नए आदेश में अमेरिकी कंपनियों और पेंशन फंड्स को नवंबर 2021 तक का समय दिया गया है ताकि वो सेना के साथ संबंध रखने वाली कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी शुन्य कर लें।


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