बांड बाजार में चिंता के माहौल के कारण टॉप की गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) को फंड जुटाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इसका कारण यह है कि निवेशक ऊंची ब्याज दर की उम्मीद कर रहे हैं और इससे वे अभी निवेश में दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। कुल 7 एनबीएफसी कंपनियों ने सोमवार से 10,300 करोड़ रुपए जुटाने की योजना बनाई थी, लेकिन उनको इसके एवज में महज 3,535 करोड़ रुपए ही मिले हैं।
बिरला, महिंद्रा, बजाज जैसी कंपनियों की थी योजना
बता दें कि आदित्य बिरला फाइनेंशियल सर्विसेस, महिंद्रा फाइनेंशियल सर्विसेस, बजाज फाइनेंस, टाटा कैपिटल, एलएंडटी फाइनेंस सहित सात कंपनियां कुल 10,300 करोड़ रुपए जुटाने के लिए सोमवार और मंगलवार को बाजार में उतरी थीँ। इसमें महज एचडीएफसी की सब्सिडियरी एचडीबी ही 1,200 करोड़ रुपए के लक्ष्य को पूरा कर पाई। एचडीबी के तीन वर्ष के बांड की दर 7.3 प्रतिशत थी। हालांकि रेट बढ़ जाने की वजह से बाकी कंपनियों को कम रकम से ही संतोष करना पड़ा।
निवेशकों ने सुरक्षित रहने का फैसला लिया है
राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के कारण बांड बाजार में घबराहट होने से निवेशकों ने सुरक्षित रहने का फैसला किया है। लॉकडाउन के कारण सरकार के फाइनेंस, आर्थिक वृद्धि की संभावना और छोटी तथा मध्यम कंपनियों के बिजनेस के सामने चुनौती पैदा हो गई है। हालांकि भारतीय रिजर्व बैंक ने ओपन मार्केट परचेज, लांग टर्म ऑपरेशन और म्यूचुअल फंड को उधारी देने के लिए बैंकों को स्पेशल विंडों देकर लिक्विडिटी पैदा की है।
मंगलवार को यील्ड में आया था उछाल
बैंकों के पास उधारी देने के लिए पर्याप्त पैसा रहे, इसलिए आरबीआई ने रिवर्स रेपो रेट को घटाकर 3.75 कर रखा है। सिस्टम में पूरी तरलता होने से बैंक कम पैसे पर उधारी दे सकेंगे। उधर इक्विटी में दबाव होने से मंगलवार को यील्ड 2-3 प्रतिशत बढ़ गई थी। बांड का जब भाव घटता है तब यील्ड बढ़ती है। इस समय एनबीएफसी कंपनियां पैसा जुटाने में असफलहैं और साथ ही उनका बारोविंग खर्च भी बढ़ रहा है।
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